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जय हो दामाद्जी की!सुभाष बुड़ावन वाला

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जय हो दामाद्जी की!!! कल तक बड़े बड़ों की बोलती बंद थी | बस इनेगिने छुटभैये नेताओं की जुबान किसी कतरनी की तरह चल रही थी |और जो चलती है वही फिसलती है |लेकिन अब सभी की जुबान चल रही है और बड़े सलीके से चल रही है बिना किसी फिसलन या विचलन के |और चले भी क्यों न ?अब समय ही कुछ ऐसा है |यदि अब भी नहीं तो फिर कब चलेगी |अब भी खामोश रहे तो कहने के लिए कुछ बचेगा ही नहीं |आलाकमान अब चुप्प रहने वालों को नहीं बख्शेगा |जो अब खामोश रहेगा बागी करार दिया जायेगा |आज की राजनीति में बागियों का क्या काम |काम का वही है जो अपने आका का पालतू बन कर रहे |केवल बन कर ही न रहे ,इस बात का निरंतर सबूत भी देता रहे कि वह ‘हिज़ मास्टर्स वायस’ है | उसके लिए वे हर चीज फालतू है जो अपने पालतू होने का पुख्ता प्रमाणपत्र नहीं देगा | आलाकमान आजकल कुपित है |विरोधी अब तो मानो सारी मर्यादा भूल गए हैं |उन्होंने दामादजी के खिलाफ जो दुष्प्रचार शुरू किया है उससे तो बनाना रिपब्लिक की संस्कृति खतरे में पड़ गई है |वैसे दामादजी बड़े आदमी हैं |वह “मैंगो पीपिल” क्या कहते हैं कि परवाह नहीं करते |वह बिजनेसमैन हैं और एक जेन्टिलमैन की तरह पैसा बनाते हैं |उनके बाग बगीचों में आम आदमी के बाग बगीचों की तरह फल फूल नहीं लगते बल्कि नीले हरे लाल नोट उगते हैं |वह अपने बगीचे में न तो बीज बोते हैं ,न खेत की निराई करते हैं ,न सींचते हैं ,फिर भी खूब फसल लहलहाती है |दामादजी चमत्कारी पुरुष हैं |वह जो चाहे कर सकते हैं |वह हमेशा वही करते रहे हैं जो वह चाहते हैं |उनके नाम सुनकर सारे कानून शिथिलऔर प्रक्रियों की जकड़ हो जाती है |किसान अपनी जमीन उनके लिए छोड़ देते हैं |बड़ी बड़ी कंपनियां अपनी जमीन उन्हें कौडियों के भाव बेच देती हैं |उनकी इच्छा सबके लिए शिरोधार्य है |वही महज दामाद नहीं दामाद शिरोमणि हैं |उनकी महिमा अपरम्पार है | यही वजह है कि आजकल सारा सरकारी अमला अतिव्यस्त है |सबके पास एक ही काम है कि विरोधियों के निर्लज्ज लांछनों का जवाब देना ,जो दामादजी को इंगित करके लगाये जा रहे हैं |विरोधियों को तो अपनी संस्कृति के पराभव की चिंता नहीं है पर सरकार को तो है |दामाद के प्रति ऐसी अशिष्टता को कौन बर्दाश्त कर सकता है ?दामाद तो देवता समतुल्य होता है |वैसे भी राजनीति में दामादों को हमेशा अतिरिक्त महत्व मिलता है |आलाकमान के लिए इमोशनली एक कठिन समय है और तमाम उसके पदाधिकारियों के लिए परीक्षा की घड़ी |यह सबके लिए आलाकमान के प्रति अपनी निष्ठा के सार्वजनिक प्रदर्शन का मौका है |निष्ठाओं के प्रमाणन के इस महायज्ञ जो जैसी आहुति देगा ,उसका राजनीतिक भविष्य वैसा ही होगा | वैसे तो दामादजी इतने सक्षम हैं कि उन्हें किसी की पैरोकारी की ज़रूरत ही नहीं है |वह वाकपटु हैं |उनकी तरकश में अकाट्य तर्कों के ऐसे ऐसे विषबुझे बाण हैं जिनसे वह अपने समस्त विरोधियों को देखते ही देखते नेस्तनाबूद कर सकते हैं |उन्होंने ही तो सारी दुनिया को बताया कि हमारा मुल्क अब भारतवर्ष नहीं बनाना रिपब्लिक है (यानि खाने पचाने के लिए एक केले जैसा स्वादिष्ट फल सरीखा ) और यहाँ का आम आदमी मैंगो जैसा सीधा सहज सरस आम जैसा ,जिसे जो चाहे जैसे चाहे गड़प कर जाये |इस बनाना रिपब्लिक के दामाद की शान में गुस्ताखी करने वाले नादान हैं |उनको उनकी ही भाषा में जो जवाब नहीं देगा ,वह राजद्रोही है | दामादजी ,आप निश्चिंत रहें |आपका कोई कुछ नहीं बिगाड पायेगा |-सुभाष बुड़ावन वाला,18,शांतीनाथ कार्नर,खाचरौद[म्प]

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

drashok के द्वारा
May 28, 2014

बहुत अच्छा व्यंग आज समय बदल गया है महान दामाद जी के ग्रह अब उतने अच्छे शायद नहीं रहेंगे डॉ शोभा भरद्वाज


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