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Salute to All Wifes...!-सुभाष बुड़ावन वाला

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अहमियत-बीबी की
सुबह उठ कर पत्नी को पुकारते है,सुनो चाय लाओ
थोड़ी देर बाद फिर आवाज़,सुनो नाश्ता बनाओ
क्या बात है ,आज अभी तक अखबार नहीं आया है
जरा देखो तो ,किसी ने दरवाजा खटखटाया है
अरे आज बाथरूम में ,साबुन नहीं है क्या
और देखो तो,कितना गीला पड़ा है तौलिया
अरे ,ये शर्ट का बटन टूटा है, जरा लगा दो और मेरे मौजे कहाँ है,जरा ढूंढ के ला दो
लंच के डब्बे में बनाये है ना,आलू के परांठे
दो ज्यादा रख देना,मिस जूली को है भाते
देखो अलमारी पर कितनी धुल जमी पड़ी है
लगता है कई दिनों से डस्टिंग नहीं की है
गमले में पौधे सूख रहे है,क्या पानी नहीं डालती हो
दिन भर करती ही क्या हो बस गप्पे मारती हो
शाम को डोसा खाने का मूड है,बना देना
बच्चों की परीक्षाये आ रही है,पढ़ा देना
सुबह से शाम तक कर फरमाईशें नचाते है चैन से सोने भी नहीं देते,सताते है
दिनभर में बीबीयाँ कितना काम करती है
ये तब मालूम पड़ता है जब वो बीमार पड़ती है
एक दिन में घर अस्त व्यस्त हो जाता है
रोज का सारा रूटीन ही ध्वस्त हो जाता है
आटे दाल का सब भाव पता पड़ जाता
बीबी की अहमियत क्या है ,ये पता चल जाता
…Salute to All Wifes…
!-सुभाष बुड़ावन वाला,18,शांतीनाथ कार्नर,खाचरौद[म्प] -




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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Neeraj Kumar के द्वारा
June 22, 2014

विडम्बना ही है कि हमलोग अपनी पत्नी की कुशल कार्यक्षमता की प्रशंशा नहीं करते हैं. वधु खोजते वक़्त गृहकार्य- कुशल होना चयन की प्रथम शर्त होती है. अच्छा है आपने याद दिला दिया. नमन पत्नियों को…

abc के द्वारा
June 22, 2014

nice kavita

    June 22, 2014

    thanks1मुझे भी आज हिंदी बोलने का शौक हुआ, घर से निकला और एक ऑटो वाले से पूछा, “त्री चक्रीय चालक पूरे बोकारो नगर के परिभ्रमण में कितनी मुद्रायें व्यय होंगी”? ऑटो वाले ने कहा, “अबे हिंदी में बोल न” मैंने कहा, “श्रीमान मै हिंदी में ही वार्तालाप कर रहा हूँ।” ऑटो वाले ने कहा, “मोदी जी पागल करके ही मानेंगे।” चलो बैठो कहाँ चलोगे? मैंने कहा, “परिसदन चलो।” ऑटो वाला फिर चकराया! “अब ये परिसदन क्या है? बगल वाले श्रीमान ने कहा, “अरे सर्किट हाउस जाएगा।” ऑटो वाले ने सर खुजाया बोला, “बैठिये प्रभु।।” रास्ते में मैंने पूछा, “इस नगर में कितने छवि गृह हैं??” ऑटो वाले ने कहा, “छवि गृह मतलब??” मैंने कहा, “चलचित्र मंदिर।” उसने कहा, “यहाँ बहुत मंदिर हैं राम मंदिर, हनुमान मंदिर, जगरनाथ मंदिर, शिव मंदिर।।” मैंने कहा, “मै तो चलचित्र मंदिर की बात कर रहा हूँ जिसमें नायक तथा नायिका प्रेमालाप करते हैं।।” ऑटो वाला फिर चकराया, “ये चलचित्र मंदिर क्या होता है??” यही सोचते सोचते उसने सामने वाली गाडी में टक्कर मार दी। ऑटो का अगला चक्का टेढ़ा हो गया। मैंने कहा, “त्री चक्रीय चालक तुम्हारा अग्र चक्र तो वक्र हो गया।” ऑटो वाले ने मुझे घूर कर देखा और कहा, “उतर जल्दी उतर! चल भाग यहाँ से।” तब से यही सोच रहा हूँ अब और हिंदी बोलूं या नहीं?–सुभाष बुड़ावन वाला,18,शांतीनाथ कार्नर,खाचरौद[म्प]


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