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सूर्यास्त के समय सोना नहीं चाहिए!सुभाष बुड़ावन वाला.,

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चुकंदर को सारी दुनिया सलाद के तौर पर अपनाती है। लाल और सफेद रंग के चुकंदर की खेती काफी राज्यों में की जाती है। सफेद चुकंदर से व्यवसायिक तौर पर शर्करा प्राप्त की जाती है, जबकि लाल चुकंदर सलाद और सब्जी के तौर पर अपनाया जाता है। आम लोगों को चुकंदर के औषधीय महत्व के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं हैं। सुदूर ग्रामीण और वनांचलों में चुकंदर से अनेक हर्बल नुस्खे तैयार किए जाते हैं। चलिए आज जानते हैं चुंकदर के औषधीय गुणों के बारे में।
चुकंदर में है एंटी एजिंग फॉर्मूला और एसिडिटी दूर करने के गुण
एंटी एजिंग प्रॉपर्टी
चुकंदर को एंटी एजिंग के लिए एक महत्वपूर्ण और कारगर फार्मूला माना गया है। यह शारीरिक कोशिकाओं को तरोताजा रखने में सहायक तो होता ही है। इसके अलावा रक्त संचार को सुचार रखने में बेहतर साबित होता है।
एसिडिटी दूर करता है
आदिवासी एसिडिटी होने पर चुकंदर के जूस के सेवन की सलाह देते हैं। चुकंदर ना सिर्फ किडनी की सफाई में मदद करता है, बल्कि यकृत को स्वस्थ बनाने में भी मदद करता है। हर्बल जानकार चुकंदर को कैंसर जैसे भयावह रोग से ग्रसित रोगी को खिलाने की सलाह देते हैं। इनका मानना है कि चुकंदर कैंसर नियंत्रण में काफी मददगार होता है। आधुनिक शोध भी कैंसर के लिए चुकंदर को महत्वपूर्ण मानते हैं। चुकंदर में पाया जाने वाला लाल रंग बेटाईन नामक रसायन की वजह से होता है, जो कैंसरग्रस्त कोशिकाओं की वृद्दि रोकने में मददगार साबित हुआ है।
हृदय रोगियों के लिए फायदेमंद
आदिवासी हर्बल जानकारों के अनुसार हृदय रोगों से ग्रस्त रोगियों को कच्चा चुकंदर चबाने से काफी फायदा होता है। हर रोज़ कम से कम 2 चुकंदर चबाने से हॄदयाघात की संभावनाएं कम होती हैं।
गर्भवती महिलाओं के लिए लाभ
आदिवासी हर्बल जानकार चुकंदर सेवन की सलाह गर्भवती महिलाओं को देते हैं। इनके अनुसार चुकंदर का सेवन महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान भी करना चाहिए। यह महिलाओं को ताकत प्रदान करता है और शरीर में रक्त की मात्रा तैयार करने में मददगार साबित होता है। चुकंदर में भरपूर मात्रा में लौह तत्व और फ़ोलिक एसिड पाए जाते हैं, जो रक्त निर्माण के लिए मददगार होते हैं।
चुकंदर को कच्चा चबाना ही ज्यादा फायदेमंद होता है, क्योंकि इसे उबालने से इसमें पाए जाने वाले महत्वपूर्ण खनिज और फोलिक अम्ल नष्ठ हो जाते हैं। माना जाता है कि जो लोग ज्यादा चुकंदर का सेवन करते हैं, उनके बाल, नाखून आदि ज्यादा चमकदार और स्वस्थ रहते हैं।
अपचन की समस्या दूर होती है
आदिवासी अपचन होने की दशा में रोगियों को कच्चा चुकंदर खाने की सलाह देते हैं। कच्चा चबाने से शरीर को पर्याप्त मात्रा में फाइबर मिलता है, जो पाचन क्रिया संतुलित कर अपचन की समस्या को दूर करने में मदद करता है।
वज़न कम करने का उपाय
वजन कम करने के लिए चुकंदर एक बेहतर उपाय है। कच्चा चुकंदर या कम से कम 2 चुकंदर का जूस तैयार कर प्रतिदिन सुबह खाली पेट लिया जाए, तो यह वजन कम करने में सहायक साबित होता है।- सुभाष बुड़ावन वाला.,1,वेदव्यास,रतलाम[मप्र]*
एक प्राचीन मान्यता है कि सूर्यास्त के समय किसी को भी लेटना या सोना नहीं चाहिए।धार्मिक कारण
कहा जाता है कि ऐसा करने से घर में बीमारी और दरिद्रता आती है। इस समय को भगवान की आराधना और आरती आदि के लिए श्रेष्ठ माना गया है। शास्त्र कहते हैं यदि आप बीमार नहीं है या कोई अन्य आवश्यक कारण नहीं है तो सूर्यास्त के समय नहीं सोना चाहिए। इस समय सोने से व्यक्ति बीमार और सुस्त हो जाता है।
ये है वैज्ञानिक कारण
जो लोग इस समय सोते हैं, उन्हें अनिद्रा का रोग होने की संभावनाएं अधिक रहती हैं। शाम के समय सोने से रात में नींद ठीक से नहीं आती हैं। एेसे में व्यक्ति रातभर करवट बदलते रहता है। नींद के समय में हेर-फेर होने से शरीर पर्याप्त ऊर्जा एकत्र नहीं कर पाता है, जिससे कमजोरी महसूस हो सकती है,पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याएं, सिर दर्द, चक्कर आना आदि बीमारियां हो सकती हैं। इसलिए सूर्यास्त के समय लेटना या सोना नहीं चाहिए।- सुभाष बुड़ावन वाला.,1,वेदव्यास,रतलाम[मप्र
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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

shakuntla mishra के द्वारा
March 2, 2015

ज्ञान वर्धक लेखन के लिए आपको बधाई सुभाष जी .


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