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अपने पसंद के पति “!सभाष बुड़ावन वाला.

Posted On: 27 Dec, 2015 Others,social issues,हास्य व्यंग में

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एक बड़े शहर में “अपने पसंद के पति “नामक एक स्टोर खुला। यह 6 मंजिला स्टोर था और हर मंजिल पर अच्छे अच्छे गुणवान पति पसंद किए जा सकते थे। पहली मंजिल से आगे बढ़ते जाने पर और बढ़िया पति की गारंटी थी। हर मंजिल पर लिखा था कि वहां किन विशेषताओं वाले पति मिलेंगे। एक महिला पति पसंद करने उस स्टोर में पहुंची। पहली मंजिल- इन पुरुषों के पास एक अच्छी नौकरी है। महिला आगे बढ़ गई और दूसरी मंजिल पर पहुंच गई। दूसरी मंजिल- इन पुरुषों के पास नौकरी भी है और ये बच्चों को भी प्यार करते हैं। महिला और आगे बढ़ी। तीसरी मंजिल- इन पुरुषों के पास नौकरी है। ये बच्चों को प्यार भी करते हैं और बहुत खूबसूरत भी हैं। “वाह”….महिला ने सोचा लेकिन वह और आगे बढ़ी। चौथी मंजिल- इन पुरुषों के पास नौकरी है। ये बच्चों को प्यार करते हैं। बहुत खूबसूरत भी हैं और ये घरेलू कामों में हाथ भी बंटाते हैं। वाह, और मुझे क्या चाहिए? यह सोचते हुए वह आगे बढ़ी। पांचवीं मंजिल- इन पुरुषों के पास नौकरी है। ये बच्चों को प्यार करते हैं। बहुत खूबसूरत हैं। घरेलू कामों में हाथ भी बंटाते हैं और बहुत रोमांटिक मिजाज के भी हैं। महिला वहां बहुत खुश हुई। थोड़ा रुकी, लेकिन आगे बढ़ गई। यह सोचकर की शायद इससे भी अधिक खूबियों वाला पति मिल जाए और छठवीं मंजिल पर पहुंची। छठवीं मंजिल पर लिखा था आप इस छठवीं मंजिल की विजिटर नंबर 4,31,456 हैं। इस मंजिल पर कोई पुरुष नहीं है। इस मंजिल पर आप अकेली हैं जो इस बात का सबूत है कि “संतोषी होना औरत के लिए असंभव है। ( पति स्टोर में शापिंग के लिए आने का बहुत बहुत धन्यवाद ) नया स्टोर- उपरोक्त स्टोर के मालिक ने ही एक और स्टोर, इसी स्टोर के सामने सड़क के पार खोला।  नाम था – नई खूबियों वाली पत्नियां “ पहली मंजिल पर लिखा था- ये स्त्रियां पुरुषों की हर बात सुनती हैं। दूसरी-तीसरी-चौथी-पांचवीं और छठवीं मंजिल पर विजिट के लिए कभी भी कोई पुरुष नहीं गया।सभाष बुड़ावन वाला.

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